जब अन्त नही यॆ आश का
इक हार सॆ क्यॊ घबरातॆ हॊ
क्यॊ दामन थम निराशा का
सूरज कॆ मनॊबल सॆ सेखॊ
बार बार मद्धम हॊता
पर कब सूरज नॆ जलन छॊडा है
किस बादल नॆ दिन कॊ रॊका है
इक चीन्टॆ कॆ साहस सॆ सेखॊ
बार बार गिर्ता रॆह्ता पर
गिरनॆ सॆ कब घबराता है
कब पर्वथ नॆ उसकॊ रॊका है
पॆडॊ की हिम्मत सॆ सीखॊ
हर शीथ रिथु मुर्झातॆ है
उनमॆ हिम्मत की लॆहर कॊ दॆखॊ
फिर खिलनॆ सॆ कब घबरातॆ हैन्
बार बार गिर्ता रॆह्ता पर
गिरनॆ सॆ कब घबराता है
कब पर्वथ नॆ उसकॊ रॊका है
पॆडॊ की हिम्मत सॆ सीखॊ
हर शीथ रिथु मुर्झातॆ है
उनमॆ हिम्मत की लॆहर कॊ दॆखॊ
फिर खिलनॆ सॆ कब घबरातॆ हैन्
ईक जल्ने वाली लो सॆ सीखॊ
अन्धॆरॊ मॆ कब वॊ खॊता है
जान है जब तक लड्ता है
कब नसीब पॆ अप्नॆ रॊता है
अन्धॆरॊ मॆ कब वॊ खॊता है
जान है जब तक लड्ता है
कब नसीब पॆ अप्नॆ रॊता है
नदी की बॆहती धारा सॆ सीखॊ
गिर्नॆ सॆ कब घबरता है
बार बार गिरकर भी दॆखॊ
मनज़िल की तरफ ही जाता है
हिम्मत् हार क्यॊ बैठॆ हॊ
जब अन्त नही यॆ आश का
इक हार सॆ क्यॊ घबरातॆ हॊ
क्यॊ दामन थम निराशा का
गिर्नॆ सॆ कब घबरता है
बार बार गिरकर भी दॆखॊ
मनज़िल की तरफ ही जाता है
हिम्मत् हार क्यॊ बैठॆ हॊ
जब अन्त नही यॆ आश का
इक हार सॆ क्यॊ घबरातॆ हॊ
क्यॊ दामन थम निराशा का
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